भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका और फायदे [Bhramari Pranayama Steps And Benefits in Hindi]

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भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका और फायदे (Bhramari Pranayama Steps And Benefits in Hindi) : क्या आपको पता है भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका और फायदे क्या होते है, अगर नहीं तो यहाँ हमने विस्तार में बताया है की भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका क्या होता है, और भ्रामरी प्राणायाम के फायदे और नुकसान क्या होते है

इसी लिए आज हम आपके लिए यह लेख लाये है, जिसे पढ़ने के बाद आपको यह ज्ञान हो जाएगा की भ्रामरी प्राणायाम करने से क्या फायदा होता है, तो चलिए शुरू करते है।

भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका और फायदे (Bhramari Pranayama Steps And Benefits in Hindi) :

भ्रामरी प्राणायाम का नाम भारतीय काली मधुमक्खी भ्रामरी के नाम पर रखा गया है, भ्रामरी प्राणायाम साँस लेने की एक तकनीक है, जिसमें साँस छोड़ने की आवाज़ ऐसी लगती है जैसे कि मधुमक्खी की आवाज़ हो।

यह प्राणायाम मन को तुरंत शांत करने में अत्यधिक प्रभावी माना गया है। यह मन को उत्तेजित करने, हताशा या चिंता से मुक्त करने और क्रोध से काफी हद तक छुटकारा पाने के लिए सबसे अच्छा साँस लेने वाले व्यायाम में से एक है।

भ्रामरी प्राणायाम एक सरल तकनीक है, इसका कहीं भी कभी भी अभ्यास किया जा सकता है – फिर चाहे आप काम पर घर पर या की किसी बाग़ीचे में हो और अपने आप को तनाव मुक्त करने के लिए यह एक त्वरित विकल्प है।

इस प्राणायाम में साँस छोड़ने पर मधुमक्खी की विशिष्ट गुनगुना आवाज़ (Humming Sound) जैसी आवाज निकलती है, जिससे हमें पता चलता है कि इसका नाम ऐसा क्यों है।

भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका और फायदे – Bhramari Pranayama (Humming Bee Breathing) steps and benefits in Hindi
भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका और फायदे (Bhramari Pranayama steps and benefits in Hindi)

भ्रामरी प्राणायाम के पीछे का विज्ञान (Bhramari Pranayama Ke Piche Ka Vigyan in Hindi) :

यह तंत्रिकाओं को शांत करने पर काम करता है, विशेष रूप से मस्तिष्क और माथे के आसपास की नसों और तंत्रिकाओं को शांत करता है, गुनगुना ध्वनि (Humming Sound) कंपन का एक प्राकृतिक शांत प्रभाव है।

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भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका (Bhramari Pranayama Karne Ka Tarika in Hindi) :

  • किसी भी जगह एक शांत वातावरण में, जहां पर अच्छी हवा आती जाती हो ध्यान करने के किसी भी सुविधाजनक आसन में बैठें और अपनी आँखें बंद कर लें।
  • अब कुछ समय के लिए अपनी आँखें बंद रखें।
  • शरीर में संवेदनाएं और आंतरिक शांति पर ध्यान केन्द्रित करें।
  • अपनी तर्जनी या मध्यमा उंगली (Middle Finger) को अपने कानों पर रखें।
  • आपके गाल और कान के बीच एक कार्टिलेज है, अपनी तर्जनी को कार्टिलेज पर रखें।
  • गहरी सांस अंदर लेते हुए और धिरे-धिरे सांस छोड़ें और धीरे से कार्टिलेज को दबाएं।
  • अब आप मधुमक्खी की तरह तेज गुनगुना आवाज (Humming Sound) करते हुए कार्टिलेज को दबाए रख सकते हैं या उसे अपनी उंगलियों से अंदर-बाहर कर सकते हैं।
  • चाहे तो आप कम आवाज़ वाली आवाज़ भी कर सकते हैं लेकिन बेहतर नतीजों के लिए ऊंची पिच बनाना अच्छा होता है।
  • फिर से गहरी सांस लेते रहे एवम एक ही पैटर्न 3-4 बार जारी रखें।

भ्रामरी प्राणायाम करने के अन्य प्रकार (Bhramari Pranayama Ke Dusre Tarike in Hindi) :

भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास आप अपनी पीठ के बल लेटकर भी कर सकते हैं। जबकि लेटते हुए प्राणायाम का अभ्यास करते समय आपको गुनगुनाने की ध्वनि (Humming Sound) बनाने पर ही ध्यान देना है और कान पर अपनी तर्जनी रखने के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं हैं। आप हर दिन 3-4 बार भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास कर सकते हैं।

बाबा रामदेव द्वारा बताया गया भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका (Baba Ramdev Bhramari Pranayama Steps By Steps in Hindi) :

भ्रामरी प्राणायाम के फायदे और लाभ (Bhramari Pranayama Ke Fayde in Hindi) :

  • भ्रामरी प्राणायाम से हमारा शरीर को क्रोध, डिप्रेशन और चिंता से तुरंत राहत मिलती है।
  • भ्रामरी प्राणायाम उच्च रक्तचाप (High Blood pressure) से ग्रस्त लोगों के लिए एक बहुत प्रभावी साँस क्रिया है क्योंकि यह उत्तेजित मन को शांत करता है।
  • अगर आपको गर्मी महसूस हो रही है या हल्का सिरदर्द है तो भ्रामरी प्राणायाम आप अवश्य करें।
  • माइग्रेन को कम करने में मदद करता है।
  • एकाग्रता और याददाश्त बढ़ाने में भ्रामरी प्राणायाम लाभदायक है।
  • आत्मविश्वास पैदा करता है।
  • रक्तचाप को कम करने में प्राणायाम लाभ करता है।
  • ध्यान की स्थति में मन को शांत करने में मदद करता है।

भ्रामरी प्राणायाम करने से पहले सावधानी (Bhramari Pranayama Me Kya Savdhani Barte in Hindi) :

  • भ्रामरी प्राणायाम करते समय यह ध्यान रखें कि आप अपनी उंगली कान के अंदर नहीं बल्कि कार्टिलेज (Cartilage) पर रख रहे हैं।
  • कार्टिलेज को बहुत जोर जबरदस्ती से न दबाएं धीरे से मध्यमा उंगली (Middle Finger) से दबाएं और छोड़ें।
  • गुनगुनाने की ध्वनि (Humming Sound) करते समय, अपना मुंह बंद रखें।
  • भ्रामरी प्राणायाम को आप अपनी अंगुलियों के साथ शनमुख मुद्रा में भी इसका अभ्यास कर सकते हैं।
  • अपने चेहरे पर ज्यादा दबाव न डालें।
  • भ्रामरी प्राणायाम को आमतौर पर योग अभ्यास की शुरुआत में वार्म-अप की तरह किया जाता है। परन्तु आप बाद में भी इस तकनीक का अभ्यास कर सकते हैं।

विशेष :

एक बार यह प्राणायाम योग शिक्षक से सही तरीके से सीख लिया जाए तो बच्चे से लेकर बुजुर्ग व्यक्ति तक कोई भी इस प्राणायाम का अभ्यास कर सकता है। केवल शर्त यह है कि इस प्राणायाम को खाली पेट किया जाना चाहिए।

आशा है इन सभी गुणों को जान ने के बाद आपको कभी यह नहीं बोलना पड़ेगा की भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका और फायदे (Bhramari Pranayama steps and benefits in Hindi) क्या होते है।

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और अगर आपके घर परिवार में भी कोई भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका और फायदे (Bhramari Pranayama steps and benefits in Hindi) जानना चाहते है तो आप उन्हें भी यह लेख भेजे जिस से उन लोगो को भी भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका और फायदे (Bhramari Pranayama steps and benefits in Hindi) के बारे में पता चलेगा।

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