भस्त्रिका प्राणायाम करने का तरीका और फायदे [Bhastrika Pranayama (Bellows Breath) Steps and Benefits in Hindi]

भस्त्रिका प्राणायाम करने का तरीका और फायदे (Bhastrika Pranayama (Bellows Breath) Steps and Benefits in Hindi) : क्या आपको पता है भस्त्रिका प्राणायाम करने का सही तरीका क्या है, अगर नहीं तो यहाँ हमने विस्तार में बताया है की भस्त्रिका प्राणायाम कैसे करे और इसके फायदे क्या होते है।    

इसी लिए आज हम आपके लिए यह लेख लाये है, जिसे पढ़ने के बाद आपको यह ज्ञान हो जाएगा की भस्त्रिका प्राणायाम कैसे करते है और भस्त्रिका प्राणायाम के फायदे क्या होते है, तो चलिए शुरू करते है।

भस्त्रिका प्राणायाम क्या है? (What is Bhastrika Pranayama (Bellows Breath) in Hindi):

भस्त्रिका प्राणायाम, प्राणायाम (या साँस लेने के व्यायाम) का एक सरल रूप है। प्राणायाम के अभ्यास करने के आसान रूपों में से एक, भस्त्रिका प्राणायाम अपने प्राकृतिक रूप से स्फूर्तिदायक लाभों के लिए लोकप्रिय है।

भस्त्रिका का संस्कृत में मतलब ‘धौंकनी’ होता है। जिस प्रकार एक “लोहार” हवा से ऊष्मा पैदा करता है और लोहे को शुद्ध: करता है, उसी प्रकार यह प्राणायाम भी मन को शुद्ध करता है और प्राणिक बाधाओं को दूर करता है।

यह साँस लेने की तकनीक आपके दिमाग को साफ करने में मदद करेगी और आपको प्राकृतिक और तत्काल ऊर्जा प्रदान करने में मदद करेगी, इसे आप किसी भी समय कर सकते है।

यह प्राणायाम शरीर में प्राण को मजबूती और स्फूर्ति प्रदान करता है। प्राण हम सभी के अंदर प्राण शक्ति है। योगिक परंपरा में, हमारी सांस पूरे शरीर में प्राण ले जाती है।

कम प्राण होने से आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली, ऊर्जा का स्तर और लचीलापन कमजोर हो जाता है। वास्तव में, हम योग का उपयोग प्राण को स्थानांतरित करने और मजबूत करने के लिए एक उपकरण के रूप में करते हैं।

प्राणायाम विशिष्ट श्वास तकनीकों और अभ्यासों के माध्यम से आपकी श्वास के नियंत्रण और नियमन से संबंधित अभ्यास है। इसमें चार भाग होते हैं: साँस लेना, आंतरिक प्रतिधारण, साँस छोड़ना और बाहरी प्रतिधारण। आइये जानते है भस्त्रिका प्राणायाम करने का तरीका और इसके फायदे क्या है।

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बाबा रामदेव द्वारा बताया गया भस्त्रिका प्राणायाम करने का सही तरीका और विधि (Baba Ramdev Bhastrika Pranayama (Bellows Breath) Step By Step Process in Hindi):

भस्त्रिका प्राणायाम करने का तरीका (How to Do Bhastrika Pranayama (Bellows Breath) Step By Step Procedure in Hindi):

यहां निचे हमने भस्त्रिका प्राणायाम (Bellows Breath) को करने के तरीके को विस्तार में बताया है, जिससे आपको ध्यान से पढना आवशयक है।

  1. भस्त्रिका प्राणायाम करने के लिए किसी भी शांत वातावरण में बैठें।
  2. फिर अपनी आँखों को बंद करें और थोड़ी देर के लिए शरीर को आराम दें और बाहरी दुनिया को भूल जाये।
  3. अपनों दोनों हाथो को ज्ञान मुद्रा में रखें।
  4. कुछ देर ध्यान में बैठें।
  5. अब यह सुनिश्चित करते हुए दोनों नासिका छिद्रों से गहरी साँस लें कि इस अभ्यास को करते समय आपका मुँह बिल्कुल भी न खुले।
  6. सांस लेने की प्रक्रिया में, आपके फेफड़ों को पूरी तरह से फुल जाना चाहिए।
  7. इसके बाद, आपको एक ही झटके में दोनों नासिका से भरी हुई सांस को छोड़ना है।
  8. साँस लेना और साँस छोड़ने की गति “ब्लोअर” की तरह तेज़ होनी चाहिए और साँस को पूरी तरह से अंदर और बाहर लेना चाहिए।
  9. फिर से सांस अंदर लें और बलपूर्वक उसे फिर से बाहर निकालें।
  10. साँस छोड़ने की गति इतनी तेज़ होनी चाहिए कि फेफड़े को झटके के साथ सिकुड़ जाए।
  11. दोनों नासिका से श्वास लेना इस प्राणायाम का एक पूरा चक्र है, जिसे भस्त्रिका प्राणायाम कहा जाता है।
  12. कुछ सामान्य सांसें लेकर एक राउंड खत्म होने के बाद थोड़ी देर आराम करें।
  13. इस प्रक्रिया को कम से कम 3 से 5 राउंड के लिए अवश्य दोहराएं।

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भस्त्रिका प्राणायाम करने से पहले यह चीजे ध्यान में रखें (Important Things For Bhastrika Pranayama (Bellows Breath) in Hindi) :

साँसों को इनहेल और एक्सहेल करने का समय समान रखना चाहिए। भस्त्रिका प्राणायाम करते समय, ढाई सेकंड (2.5 सेकंड) में सांस लेने का समय और साँस छोड़ने का समय भी ढाई सेकंड (2.5 सेकंड) दोनों समान होना चाहिए। इस तरह, यह प्राणायाम एक मिनट में 12 बार किया जा सकता है।

जैसा कि आप भस्त्रिका प्राणायाम करने का तरीका जानकर इसके अभ्यास में प्रगति करते हैं, तब ही इसकी गति को बढ़ाये। इसका अभ्यास तीन अलग-अलग सांस की दरों पर किया जा सकता है जैसे: धीमी (2 सेकंड में 1 साँस), मध्यम (1 सेकंड में 1 साँस) और तेज़ (1 सेकंड में 2 साँस), पारंगत होने के बाद ही आपकी क्षमता के आधार पर गति बढ़ाये।

जब आप यह प्राणायाम करते समय सांस लेते हैं, तो आपका पेट क्षेत्र आपके पेट की बजाय फुदकना चाहिए।

अगर आप योग विशेषज्ञ से योग सिख रहे है तो यह करना आपके लिए बहुत ही आसन होगा। खैर, इस प्राणायाम को शुरुआत में केवल धीरे धीरे ही करें, एवं भस्त्रिका प्राणायाम (Bhastrika Pranayama) का रोज अभ्यास करे।

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भस्त्रिका प्राणायाम करने का तरीका और फायदे (Bhastrika Pranayama (Bellows Breath) Steps And Benefits in Hindi)

भस्त्रिका प्राणायाम के फायदे और लाभ [Benefits of Bhastrika Pranayama (Bellows Breath) in Hindi]:

  1. भस्त्रिका प्राणायाम (Bellows Breath) में, जब हम सांस लेते हैं, तो फेफड़ों में बहुत अधिक ऑक्सीजन होती है जो रक्त को शुद्ध करने में मदद करती है। यह वात, पित्त और कफ को संतुलित करता है।
  2. कई अध्ययनो ने भी इसकी पुष्टि की है कि इस अभ्यास से तंत्रिका तंत्र में सुधार के साथ साथ हम हाई रक्तचाप को नियंत्रित कर सकते हैं। दूसरी ओर, यह हृदय की बढ़ी हुई दर को सुधारने में भी सहायक है।
  3. यह प्राणायाम पेट की चर्बी कम करने में भी हमारी मदद करता है।
  4. यह कहना गलत नहीं होगा कि इस प्राणायाम के लाभ कई श्वसन समस्याओं में फायदेमंद साबित हो सकते हैं। यह प्राणायाम अस्थमा, प्रदूषण, धूम्रपान, संक्रमण और जीवन शैली के कारण होने वाली एलर्जी सहित श्वास संबंधी विभिन्न समस्याओं से छुटकारा दिलाने के लिए बहुत सहायक माना जाता है।
  5. इस प्राणायाम को करने से शरीर की सभी नसों की शुद्धि और शरीर में रक्त संचार प्रक्रिया में सुधार होता है।
  6. यह प्राणायाम कुंडलिनी जागरण में मदद करता है, मस्तिष्क को स्वस्थ रखता है और ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।
  7. यह आसन सर्दियों के मौसम में अवश्य करना चाहिए, इससे शरीर में गर्मी पैदा होती है।
  8. हठप्रदीपिका 2/65 के अनुसार, यह प्राणायाम, पित्त और बलगम की अधिकता से होने वाले रोगों को दूर करने में मदद करता है।
  9. भस्त्रिका प्राणायाम का सबसे अच्छा लाभ यह है कि यह हमारे फेफड़ों को मजबूत बनाता है। फेफड़े हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हर सांस के साथ शरीर में जितनी ज्यादा ऑक्सीजन पहुचेगी, हमारा शरीर उतना ही सेहतमंद रहेगा।
  10. यह सामान्य स्वास्थ्य में सुधार करता है और सभी अंगों को सक्रिय करता है।
  11. सुबह-सुबह प्राणायाम करने से प्राकृतिक रूप से चमकती त्वचा पाने में मदद मिलती है।
  12. यह प्राणायाम आपको अपने दिनभर के डिप्रेशन को दूर करने में भी मदद कर सकता है।

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भस्त्रिका प्राणायाम करने से पहले सावधानी [Bhastrika Pranayama (Bellows Breath) Precautions in Hindi]:

भस्त्रिका प्राणायाम (Bellows Breath / Bhastrika Pranayama) करने से पहले आपको निचे दर्शायी गयी निम्न बातो को अवश्य ध्यान रखना चाहिए:

  • अगर आपकी हाल ही में अपेंडिक्स या कोई अन्य सर्जरी / ऑपरेशन हुआ है, तो किसी भी प्रकार का योग या एक्सरसाइज करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें।
  • यदि आप गर्भवती हैं, तो भस्त्रिका प्राणायाम (Bhastrika Pranayama) का अभ्यास न करें।
  • यदि आपकी नाक सर्दी की वजह से रुकी हुई है तो इसका अभ्यास न करें।
  • जिन लोगो में अनियंत्रित उच्च रक्तचाप, मिर्गी, दौरे और दिल की गंभीर समस्या आदि जैसी समस्याएं हैं तो उन्हें भस्त्रिका प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
  • तीव्र बुखार और दमा/अस्थमा होने पर इस प्राणायाम को न करे।
  • इस प्राणायाम को कभी भी खाली पेट करें नहीं तो यह पेट में दर्द का कारण बन सकता है।
  • खाने के कम से कम दो घंटे बाद प्रतीक्षा करें और फिर ही इस प्राणायाम का अभ्यास करे।
  • भस्त्रिका प्राणायाम (Bhastrika Pranayama) एक ऊर्जावान अभ्यास है, इसलिए इसे सोने के समय करने से बचने की कोशिश करें, नहीं तो आपको सोने में मुश्किल आ सकती है।
  • इस प्राणायाम को करते समय, अगर आपको चक्कर आना, मतली, घबराहट या बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई दे तो इसे करना तुरंत बंद कर दे।
  • शुरुआती लोगों को इस प्राणायाम का अभ्यास धीरे-धीरे करना चाहिए।
  • गर्मी के मौसम में भस्त्रिका के अधिकतम 2 मिनट के अभ्यास से अधिक न करें।
  • यह प्राणायाम करने से पहले नाक को अच्छी तरह से साफ कर लें।

आशा है इन सभी गुणों को जान ने के बाद आपको कभी यह नहीं बोलना पड़ेगा की भस्त्रिका प्राणायाम करने का तरीका और फायदे (Bhastrika Pranayama (Bellows Breath) Steps And Benefits in Hindi) क्या होते है।

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और अगर आपके घर परिवार में भी कोई भस्त्रिका प्राणायाम करने का सही तरीका और फायदे (Bhastrika Pranayama (Bellows Breath) Steps And Benefits in Hindi) के बारे में जानना चाहते है तो आप उन्हें भी यह लेख भेजे जिस से उन लोगो को भी भस्त्रिका प्राणायाम करने का तरीका और फायदे (Bhastrika Pranayama (Bellows Breath) Steps And Benefits in Hindi) के बारे में पता चलेगा।

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