कोरोना वायरस और स्वास्थ्य चुनौतियां (COVID-19)

कोरोना (COVID-19)

कोरोना वायरस और स्वास्थ्य चुनौतियां:-

कोरोना वायरस (COVID-19) और स्वास्थ्य चुनौतियां: मशहूर वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन के सिद्धांत सर्वाइवल ऑफ़ दी फिटेस्ट (Survival of the fittest) के अनुसार केवल वहीं लोग जीवित रहेंगे जो लगातार बदलते हैं, और फिट रहते हैं।

कोरोना काल (COVID-19)में यह सिद्धांत चरितार्थ होता दिखाई दे रहा है, क्योंकि अब केवल वही लोग जीवित रहेंगे, यात्रा कर पाएंगे, छुट्टियों पर जा पाएंगे तथा अपने परिवार एवं समाज को बचा पाएंगे, जो स्वास्थ्य की चुनौतियों पर खरे उतरेंगे। अर्थात अब लोगों का survival इस बात पर निर्भर करेगा कि वे कितने फिट और कितने स्वस्थ है, अर्थात स्वास्थ्य ही आप की डिग्री होगी तथा स्वास्थ्य ही आपका पासपोर्ट होगा।

स्वास्थ्य ही इस धरातल पर गिरी अर्थव्यवस्था को नयी ऑक्सीजन दे पाएगा क्योंकि स्वास्थ्य ही निश्चित करेगा कि लोगों को पुनः नौकरियां, रोजगार मिले, फैक्ट्री कारखानों को पुनः शुरू किए जाएं।

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अनलॉक के इस दौर में वैज्ञानिकों ने तीन सुझाव दिए हैं-

कोरोना (COVID-19)

  1. जब तक कोरोना वायरस(COVID-19) की वैक्सीन तैयार ना हो जाए तब तक लोगों को घरों में बंद रखा जाए।
  2. जिन व्यक्तियों के शरीर में कोरोना(COVID-19) के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गई है उन्हें घरों से बाहर निकलने की, काम पर जाने की इजाजत दे दी जाए।
  3. विश्व की समस्त जनसंख्या को कोरोना(COVID-19) संक्रमित होने दिया जाए जिससे उनके शरीर में कोरोना के प्रति एंटीबॉडी विकसित हो जाए, जिसे हार्ड इम्यूनिटी कहते हैं। यह लोग दोबारा बीमार नहीं होंगे, ऐसा मानते हैं।

केवल बीमार एवं बुजुर्गों को छोड़कर।अब इम्यूनिटी या स्वस्थ दिनचर्या ही एकमात्र रास्ता दिखाई पड़ता है। इसको देखते हुए कुछ देश जैसे ब्रिटेन, अमेरिका, चिली, इटली,और जर्मनी अपने नागरिकों को इम्यूनिटी पासपोर्ट जारी करने की सोच रहे हैं।

कुछ दिनों पहले इम्यूनिटी पासपोर्ट की खूब चर्चा रही और हो सकता है आगे आने वाले भविष्य में इम्यूनिटी सर्टिफिकेट ही व्यक्ति की अहम योग्यता बन जाए।

इससे विश्व में स्वास्थ्य का बंटवारा होना संभव लग सकता है।भारत जैसे देश जहां स्वास्थ्य व्यवस्थाएं इतनी अच्छी नहीं है,वहां लोग हमेशा से वायरस, बैक्टीरिया आदि के संपर्क में आते रहे हैं और प्राकृतिक रूप से यहां लोगों में इम्यूनिटी पावर विकसित है।

इसका परिणाम कोरोना से होने वाली मृत्यु दर से लगाया जा सकता है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

मशहूर लेखक युवल नोहा हरारी की बुक 21Lessons for the 21st Centuryके अनुसार विश्व में जैविक रूप से दो गुट बन सकते हैं,अर्थात वे जो सुपर ह्यूमन है और वे जो सामान्य व्यक्ति हैं। सुपर ह्यूमन वे लोग जिनकी काम करने की रफ्तार कंप्यूटर जैसी है ,अर्थात जिनके पास स्वास्थ्य की मास्टर डिग्री है।

विश्व में इस तरह की भयानक समस्या का जिम्मेदार कौन हो सकता है, इसका कोई प्रमाण नहीं है लेकिन इतना जरूर है भविष्य में स्वास्थ्य ही एकमात्र जरिया होगा धर्म,कर्म और ज्ञान का।

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